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Volume 27, Issue 1

December 2025

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8 articles
Pages 01-052 views10 downloads

बौद्ध शिक्षा दर्शन में प्रतीत्य समुत्पाद का सिद्धांत एवं उसका शैक्षिक महत्व

आशीष कुमार पाठक शोध-छात्र, शिक्षा संकाय, सनराइज विश्वविद्यालय, राजस्थान

सार प्रस्तुत शोध पत्र में बौद्ध दर्शन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं केन्द्रीय सिद्धांत प्रतीत्य समुत्पाद (द्वादश निदान) का दार्शनिक तथा शैक्षिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण किया गया है। बौद्ध दर्शन के अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु …

Pages 06-122 views6 downloads

समकालीन शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों का क्षरण: कारण, प्रभाव एवं समाधान

डाॅ. रामानन्द तिवारी1 1. उत्कर्ष फाउण्डेशन, गोण्डा

सार समकालीन शिक्षा प्रणाली तीव्र सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों के प्रभाव में निरंतर परिवर्तनशील है। शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न होकर व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक विकास तथा सामाजिक उत्तरदाय…

Pages 13-183 views3 downloads

वैश्विक-मानक संस्थाओं का विकास: एन0ई0पी0 2020 के सन्दर्भ में

डाॅ0 मनिक मोहन शुक्ल1 विभागाध्यक्ष, बी0एड्0 विभाग, अनुग्रह मेमोरियल काॅलेज, बोधगया, बिहार।

सारांश वैश्वीकरण, तकनीकी प्रगति, विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा ने वैश्विक शिक्षा प्रणाली को नए आयाम दिए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय शिक्षा में वैश्विक-मानक संस्थाओं की आवश्यकता और महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। ऐसी संस्थाएँ…

Pages 19-253 views2 downloads

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का वैदिक शिक्षा के संदर्भ में विश्लेषण

प्रो0 श्री प्रकाश मिश्र

सारांश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (छम्च् 2020) भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का दस्तावेज है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान प्रणाली से जोड़ते हुए 21वीं सदी की वैश्विक आवश्यकताओं के अन…

Pages 46-613 views1 downloads

शिक्षण शैलियों का माध्यमिक छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धि पर प्रभाव: पटना जिले का एक शोध

मधु कुमारी, डाॅ0 गीता पाण्डेय

सार प्रस्तुत शोध का उद्देश्य पटना जिले के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की शिक्षण शैलियों तथा विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि के मध्य संबंध का अध्ययन करना है। ग्राशा (1996) द्वारा प्रतिपादित पाँच शिक्षण शैलियों विशे…