Abstract
प्रस्तुत शोध का उद्देश्य पटना जिले के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की शिक्षण शैलियों तथा विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि के मध्य संबंध का अध्ययन करना है। ग्राशा (1996) द्वारा प्रतिपादित पाँच शिक्षण शैलियों विशेषज्ञ, औपचारिक प्राधिकारी, व्यक्तिगत आदर्श, सुविधादाता एवं प्रतिनिधायक को सैद्धांतिक आधार मानकर यह अध्ययन संपन्न हुआ। वर्णनात्मक सर्वेक्षण अभिकल्प पर आधारित इस शोध में पटना जिले के 12 माध्यमिक विद्यालयों से स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिचयन द्वारा 400 छात्र तथा 80 शिक्षक चयनित किए गए। आँकड़ों के संकलन हेतु ग्राशा-रीचमान शिक्षण शैली सूची एवं विषयगत शैक्षणिक उपलब्धि परीक्षण का प्रयोग हुआ। परिकल्पना यह थी कि शिक्षण शैली एवं उपलब्धि के बीच सार्थक संबंध विद्यमान है। सांख्यिकीय विश्लेषण हेतु मध्यमान, मानक विचलन, 't'-परीक्षण, पियर्सन सहसंबंध तथा ANOVA का प्रयोग किया गया। परिणामों ने स्पष्ट किया कि सुविधादाता एवं व्यक्तिगत आदर्श शैलियों का उपलब्धि पर धनात्मक एवं सार्थक प्रभाव है, जबकि पूर्णतः विशेषज्ञ-केंद्रित शैली का प्रभाव अपेक्षाकृत न्यून रहा। निष्कर्षतः छात्र-केंद्रित शिक्षण शैलियों को अपनाने से पटना के विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
Keywords
शिक्षण शैली, शैक्षणिक उपलब्धि, माध्यमिक छात्र, पटना जिला, ग्राशा मॉडल
Author Affiliations
शोधार्थी, शिक्षा विभाग, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार
शोध निर्देशिका, शिक्षा विभाग, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार
