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Announcement
Research Article

वैश्विक-मानक संस्थाओं का विकास: एन0ई0पी0 2020 के सन्दर्भ में

डाॅ0 मनिक मोहन शुक्ल

Abstract

वैश्वीकरण, तकनीकी प्रगति, विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा ने वैश्विक शिक्षा प्रणाली को नए आयाम दिए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय शिक्षा में वैश्विक-मानक संस्थाओं की आवश्यकता और महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। ऐसी संस्थाएँ न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अनुसंधान प्रदान करती हैं, बल्कि आधुनिक अवसंरचना, प्रगतिशील प्रशासनिक प्रथाएँ, और नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों को भी अपनाती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (छम्च्) 2020 इस दिशा में एक दूरदर्शी नीति के रूप में सामने आई है, जो भारत में विश्व-स्तरीय संस्थानों के निर्माण और विकास पर विशेष बल देती है।
छम्च् 2020 का उद्देश्य केवल आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक और ज्ञान परंपराओं, मूल्य-आधारित शिक्षा, और समग्र मानव विकास पर भी ध्यान केंद्रित करना है। नीति बहुविषयक शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अनुसंधान और नवाचार, डिजिटल शिक्षा और तकनीकी एकीकरण, और सतत विकास जैसे प्रमुख पहलुओं पर जोर देती है।
यह शोधपत्र वैश्विक-मानक संस्थाओं के लक्षण, उनके रणनीतिक ढांचे, विकास के लिए आवश्यक नीतिगत उपाय, संभावित चुनौतियाँ, और उपलब्ध अवसरों का विश्लेषण करता है। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे छम्च् 2020 के अंतर्गत बहुविषयक शिक्षा और वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत को एक ज्ञान-संचालित वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
निष्कर्ष स्वरूप कह सकते हैं कि कि वैश्विक-मानक संस्थाओं का निर्माण न केवल भारतीय शिक्षा की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर सक्षम, नैतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने में भी सहायक होगा।

Keywords

वैश्विक-मानक संस्थाएँ, NEP 2020, अंतरराष्ट्रीयकरण, भारतीय ज्ञान प्रणाली, उच्च शिक्षा, शोध

Author Affiliations

विभागाध्यक्ष, बी0एड्0 विभाग, अनुग्रह मेमोरियल काॅलेज, बोधगया, बिहार।