Abstract
भारतीय सभ्यता और संस्कृति की आधारशिला जिन शाश्वत एवं सार्वकालिक मूल्यों पर स्थापित है, उनका सर्वाधिक सजीव, संतुलित और आदर्श स्वरूप श्रीराम के जीवन एवं चरित्र में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। श्रीराम केवल धार्मिक श्रद्धा के केंद्रबिंदु नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय सनातन परंपरा में नैतिकता, कर्तव्यबोध, करुणा, त्याग, संयम और न्याय के सर्वोच्च मानदंड के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनका व्यक्तित्व मानव जीवन के लिए एक ऐसी आदर्श आचार-संहिता प्रस्तुत करता है, जो व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक तथा शासकीय सभी स्तरों पर मार्गदर्शन प्रदान करती है।
यह शोध पत्र श्रीराम के चरित्र में निहित सनातन दर्शन, भारतीय संस्कारों और सच्चरित्र के विविध आयामों का गहन एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किस प्रकार श्रीराम का जीवन आदर्श पुरुष, आदर्श पुत्र, आदर्श भ्राता, आदर्श पति, आदर्श शासक तथा आदर्श मानव के रूप में स्थापित होता है और क्यों ये आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे। श्रीराम का चरित्र यह दर्शाता है कि धर्म केवल सैद्धांतिक अवधारणा नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन में नैतिक निर्णयों और कर्तव्यनिष्ठ आचरण का मार्ग है।
इस शोध में ग्रंथीय अध्ययन, दार्शनिक विवेचन तथा सामाजिक दृष्टिकोण के माध्यम से श्रीराम के चरित्र का मूल्यांकन किया गया है। साथ ही यह भी विश्लेषित किया गया है कि समकालीन समाज में व्याप्त नैतिक संकट, सामाजिक विघटन और मूल्यहीनता के संदर्भ में श्रीराम के आदर्श किस प्रकार समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं। निष्कर्षतः यह अध्ययन प्रतिपादित करता है कि श्रीराम का जीवन और चरित्र न केवल भारतीय संस्कृति की आत्मा है, बल्कि आधुनिक समाज के लिए भी नैतिक, सामाजिक और शैक्षिक मार्गदर्शन का शाश्वत स्रोत है।
Keywords
श्रीराम, सनातनधर्म, संस्कार, सच्चरित्र रामायण, नैतिक मूल्य, आदर्श जीवन
Author Affiliations
बी0एड्0 विभाग, एम0एल0के0पी0जी0 कालेज, बलरामपुर
