Abstract
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) ने शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, प्रशासन तथा अनुसंधान सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। उच्च शिक्षा का क्षेत्र भी इस तकनीकी परिवर्तन से अछूता नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, शैक्षिक मूल्यांकन, शोध कार्य, शैक्षणिक प्रबंधन तथा विद्यार्थियों की व्यक्तिगत अधिगम आवश्यकताओं को पूरा करने के नए अवसर प्रदान किए हैं। विशेष रूप से जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Generative AI) के विकास ने उच्च शिक्षा संस्थानों में ज्ञान के सृजन, सूचना के विश्लेषण, शैक्षणिक लेखन और संवादात्मक अधिगम की प्रकृति को प्रभावित किया है।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका का समीक्षात्मक अध्ययन करना तथा इसके शैक्षिक, अकादमिक, अनुसंधानपरक एवं प्रशासनिक प्रभावों का विश्लेषण करना है। यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक समीक्षा पद्धति का अनुसरण करता है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित उपलब्ध पुस्तकों, शोध-पत्रों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों तथा शिक्षा संबंधी नीतिगत दस्तावेजों का अध्ययन किया गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि AI व्यक्तिगत अधिगम, स्मार्ट ट्यूटरिंग, स्वचालित मूल्यांकन, शोध सहायता और शैक्षणिक प्रशासन को अधिक प्रभावी बना सकता है। इसके साथ ही डेटा गोपनीयता, एल्गोरिद्मिक पक्षपात, डिजिटल विभाजन, बौद्धिक संपदा, अकादमिक ईमानदारी तथा मानवीय शिक्षक की भूमिका जैसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न भी उत्पन्न होते हैं।
अध्ययन का निष्कर्ष है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुँच और प्रभावशीलता में सुधार करने की क्षमता रखती है, लेकिन इसका उपयोग मानवीय विवेक, नैतिक उत्तरदायित्व और शैक्षणिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। अतः उच्च शिक्षा संस्थानों में AI को शिक्षक का विकल्प मानने के स्थान पर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का सहयोगी साधन स्वीकार करना अधिक उपयुक्त है।
Keywords
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उच्च शिक्षा, जनरेटिव AI, डिजिटल अधिगम, शैक्षिक तकनीकी, व्यक्तिगत अधिगम, अकादमिक ईमानदारी, शोध एवं नवाचार।
Author Affiliations
सहयुक्त आचार्य, एच.आर.पी.जी. कॉलेज, खलीलाबाद, जनपद–संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश, भारत।
