Abstract
सारांश (Abstract)
यह शोध-पत्र आचार्य विनोबा भावे के शैक्षिक उद्देश्यों की वर्तमान शिक्षा के संदर्भ में प्रासंगिकता का अध्ययन प्रस्तुत करता है। विनोबा भावे शिक्षा को जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया मानते थे, जिसका उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना है। उनके शिक्षा-दर्शन में शारीरिक एवं मानसिक विकास, स्वावलम्बन, नवीन मूल्यों की स्थापना, मानवता का विकास, सामूहिक भावना तथा लोकतांत्रिक भावना को विशेष महत्व दिया गया है। प्रस्तुत अध्ययन में इन शैक्षिक उद्देश्यों की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में उपयोगिता एवं प्रासंगिकता का विवेचन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि मूल्यपरक, मानवीय, स्वावलम्बी एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी व्यक्तित्व के निर्माण के लिए विनोबा भावे के शैक्षिक विचार आज भी महत्वपूर्ण हैं।
यह शोध-पत्र आचार्य विनोबा भावे के शैक्षिक उद्देश्यों की वर्तमान शिक्षा के संदर्भ में प्रासंगिकता का अध्ययन प्रस्तुत करता है। विनोबा भावे शिक्षा को जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया मानते थे, जिसका उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना है। उनके शिक्षा-दर्शन में शारीरिक एवं मानसिक विकास, स्वावलम्बन, नवीन मूल्यों की स्थापना, मानवता का विकास, सामूहिक भावना तथा लोकतांत्रिक भावना को विशेष महत्व दिया गया है। प्रस्तुत अध्ययन में इन शैक्षिक उद्देश्यों की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में उपयोगिता एवं प्रासंगिकता का विवेचन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि मूल्यपरक, मानवीय, स्वावलम्बी एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी व्यक्तित्व के निर्माण के लिए विनोबा भावे के शैक्षिक विचार आज भी महत्वपूर्ण हैं।
Keywords
विनोबा भावे, शैक्षिक उद्देश्य, शिक्षा दर्शन, स्वावलम्बन, मूल्य शिक्षा, मानवता, सामूहिक भावना, लोकतांत्रिक भावना, आधुनिक शिक्षा
Author affiliations
सहायक आचार्य b.ed विभाग लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय गोंडा
