Abstract
यह शोध-पत्र स्त्री शिक्षा के महत्व एवं वर्तमान स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें प्राचीन काल से आधुनिक समय तक स्त्री शिक्षा के विकास, सामाजिक संरचना में महिलाओं की स्थिति तथा महिला शिक्षा के प्रति बदलती सामाजिक दृष्टि का विवेचन किया गया है। अध्ययन में वैदिक काल, मध्यकाल तथा आधुनिक काल में स्त्री शिक्षा की स्थिति और उसके विकास में विभिन्न सामाजिक सुधार आंदोलनों एवं शैक्षिक प्रयासों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। शोध-पत्र में महिला साक्षरता के संदर्भ में उपलब्ध आँकड़ों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों तथा महिला एवं पुरुष साक्षरता के बीच अंतर को भी प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि स्त्री शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। वर्तमान समय में विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बावजूद सामाजिक रूढ़ियों, लैंगिक भेदभाव, गरीबी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक सीमित पहुँच जैसी समस्याएँ महिला शिक्षा के मार्ग में बाधा बनी हुई हैं। अतः महिलाओं को समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सामाजिक सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है।
Keywords
स्त्री विमर्श, स्त्री शिक्षा, महिला साक्षरता, महिला सशक्तीकरण, लैंगिक समानता, महिला शिक्षा, सामाजिक विकास, ग्रामीण महिला, शिक्षा का महत्व
Author affiliations
एसोसिएट प्रोफेसर बीएड विभाग रतन सेन डिग्री कॉलेज बांसी सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश
