ISSN: 2319-8095Track ManuscriptPay OnlineSign in
Updates

नवगीत की अभिव्यक्तिगत प्रवृत्तियां

सुधांशु कुमार श्रीवास्तव

Abstract

यह शोध-पत्र हिन्दी नवगीत की अभिव्यक्तिगत प्रवृत्तियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। नवगीतकारों ने पारंपरिक काव्य-विधाओं से अलग नवीन शब्दावली, भाषा, लय, छंद और कथ्य का प्रयोग करते हुए समकालीन जीवनानुभवों को अभिव्यक्ति प्रदान की है। अध्ययन में नवगीत की भाषिक संरचना, विषय-विधान, अलंकृत, प्रतीकात्मक, सांकेतिक एवं मनोविश्लेषणात्मक विषयों के साथ-साथ पद-योजना, टेक-पद्धति, छंद-योजना और लयात्मकता का विवेचन किया गया है। नवगीत में बोलचाल की भाषा, तत्सम शब्दावली, उर्दू एवं अंग्रेजी के प्रचलित शब्दों तथा आंचलिक शब्दों के प्रयोग से लोक-जीवन और समकालीन यथार्थ को अभिव्यक्त करने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। अध्ययन यह भी स्पष्ट करता है कि नवगीत की छंद एवं लय-व्यवस्था पूर्ववर्ती काव्य-परंपरा से भिन्न होते हुए नवीन प्रयोगशीलता को सामने लाती है। इस प्रकार नवगीत आधुनिक हिन्दी गीत-काव्य में नवीन कथ्य, भाषा, शिल्प और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनकर उभरता है।

Keywords

नवगीत, अभिव्यक्तिगत प्रवृत्तियाँ, नवगीत की भाषा, नवगीत में विषय-विधान, पद-योजना, टेक-पद्धति, छंद-योजना, लयात्मकता, प्रतीकात्मकता, सांकेतिकता

Author affiliations

शोध छात्र हिंदी विभाग एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर

Download Full Paper PDFBack to Issue