Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र में जनपद बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) के हरैया सतघरवा विकास खण्ड में प्राकृतिक आपदाओं के स्थानीय स्वरूप, उनके प्रभाव, जोखिम तथा आपदा प्रबंधन एवं नियोजन का अध्ययन किया गया है। अध्ययन क्षेत्र भौगोलिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से विविध होने के कारण बाढ़, भूकंप, आकाशीय विद्युत, अतिवृष्टि, सूखा, शीतलहर एवं गर्मलहर, त्वरित मृदा अपरदन, जहरीले रसायनों के प्रभाव तथा जलाशयों में वनस्पतियों के तीव्र विकास जैसी विभिन्न प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं से प्रभावित होता है। शोध में आपदा के स्वरूप, संवेदनशीलता, जोखिम तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रबंधन व्यवस्था का विश्लेषण करते हुए आपदा-पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान राहत तथा आपदा के बाद पुनर्वास एवं क्षतिपूर्ति जैसे पक्षों पर विचार किया गया है। अध्ययन में विशेष रूप से बाढ़ एवं सूखा प्रबंधन, भूकंपीय जोखिम को कम करने, जल निकासी एवं जल संरक्षण, वन संरक्षण, रासायनिक प्रदूषण नियंत्रण तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर बल दिया गया है। शोध के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जोखिम की पहचान, पूर्व चेतावनी प्रणाली, जन-जागरूकता, सामुदायिक प्रशिक्षण तथा वैज्ञानिक एवं स्थानीय नियोजन का समन्वय आवश्यक है।
Keywords
प्राकृतिक आपदा, आपदा प्रबंधन, आपदा जोखिम, हरैया सतघरवा, बलरामपुर, बाढ़, सूखा, भूकंप, पर्यावरण प्रबंधन, आपदा नियोजन।
Author affiliations
शोध छात्रा,भूगोल विभाग म के पीजी कॉलेज बलरामपुर
एसोसिएट प्रोफेसर भूगोल विभाग एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर
