Abstract
प्रस्तुत शोधलेख में डॉ. जगदीश गुप्त की दृष्टि में नई कविता के स्वरूप, विशेषताओं और वैचारिक आधार का अध्ययन किया गया है। लेख के अनुसार नई कविता प्रगतिवादी तथा प्रयोगवादी काव्यधाराओं के महत्वपूर्ण तत्वों को आत्मसात करते हुए आधुनिक जीवन, मानवतावाद, यथार्थ-बोध और सामाजिक चेतना को अभिव्यक्त करती है। डॉ. गुप्त ने नई कविता को केवल नवीन काव्य-शैली न मानकर आधुनिक मनुष्य के अनुभवों और जीवन-संघर्षों की अभिव्यक्ति के रूप में देखा है। उनकी दृष्टि में नई कविता में मानवतावादी चेतना, यथार्थपरक दृष्टिकोण, बौद्धिकता, सामाजिक सरोकार, नवीन प्रतीक-विधान तथा भाषा की सहजता प्रमुख हैं। लेख में नई कविता और गीत के संबंध, आधुनिकता, मानव-मूल्यों तथा यथार्थ-बोध पर भी विचार किया गया है। निष्कर्षतः डॉ. जगदीश गुप्त नई कविता के प्रमुख पुरोधा कवि के रूप में आधुनिक हिंदी कविता को यथार्थ और मानवीय संवेदना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Keywords
नई कविता, डॉ. जगदीश गुप्त, आधुनिक हिंदी कविता, मानवतावाद, यथार्थवाद, आधुनिकता, काव्य-चेतना, प्रयोगवाद, प्रगतिवाद, सामाजिक चेतना, काव्य-संवेदना
Author affiliations
प्रवक्ता बीएमसी महाविद्यालय श्रावस्ती उत्तर प्रदेश
