Abstract
यह शोध-पत्र दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता एवं उपयोगिता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। दूरस्थ शिक्षा ऐसी शिक्षण व्यवस्था है जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से एक ही स्थान पर उपस्थित न होकर मुद्रित सामग्री, रेडियो, दूरदर्शन, ऑडियो-विजुअल साधनों, कंप्यूटर तथा अन्य संचार माध्यमों के द्वारा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में जुड़े रहते हैं। लेख में औपचारिक, निरौपचारिक तथा अनौपचारिक शिक्षा के स्वरूपों को स्पष्ट करते हुए दूरस्थ शिक्षा की अवधारणा, आवश्यकता, उद्देश्यों, साधनों, सीमाओं तथा उपयोगिता पर चर्चा की गई है। अध्ययन में जनसंख्या वृद्धि, शिक्षा के अवसरों की आवश्यकता, औपचारिक संस्थानों में सीमित प्रवेश तथा कार्यरत व्यक्तियों के लिए शिक्षा की निरंतरता जैसे कारणों को दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता से जोड़ा गया है। दूरस्थ शिक्षा में मुद्रित सामग्री, रेडियो, दूरदर्शन, कंप्यूटर तथा अध्ययन केंद्रों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया है। लेख में राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय तथा मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के विस्तार का भी उल्लेख मिलता है। निष्कर्षतः दूरस्थ शिक्षा को शिक्षा के व्यापक प्रसार, कार्यरत एवं वंचित वर्गों तक शैक्षिक अवसर पहुँचाने तथा आजीवन शिक्षा की अवधारणा को साकार करने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
Keywords
दूरस्थ शिक्षा, मुक्त शिक्षा, औपचारिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा, शिक्षा के साधन, रेडियो, दूरदर्शन, कंप्यूटर, अध्ययन केंद्र, आजीवन शिक्षा
Author affiliations
असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड विभाग एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर
