Abstract
बालकों के सर्वांगीण विकास में पाठ्य सहगामी क्रियाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, नैतिक एवं भावात्मक विकास के लिए विभिन्न पाठ्य सहगामी गतिविधियों का आयोजन आवश्यक है। प्रस्तुत अध्ययन में विद्यालयों में आयोजित खेल-कूद, वाद-विवाद, नाटक, कला, संगीत तथा विभिन्न प्रतियोगितात्मक गतिविधियों के महत्व का अध्ययन किया गया है। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व, ईमानदारी, धैर्य, सहानुभूति तथा सामाजिक समायोजन जैसे गुणों का विकास होता है। पाठ्य सहगामी क्रियाएँ विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं को अभिव्यक्त करने तथा उनकी रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करने का अवसर प्रदान करती हैं। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि विद्यालयी शिक्षा में पाठ्य सहगामी क्रियाओं को नियमित एवं व्यवस्थित रूप से स्थान दिया जाना चाहिए तथा इनके संचालन के लिए आवश्यक संसाधन, समय और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
Keywords
पाठ्य सहगामी क्रियाएँ, बाल विकास, सर्वांगीण विकास, विद्यालयी शिक्षा, शारीरिक विकास, मानसिक विकास, सामाजिक विकास, नैतिक विकास, व्यक्तित्व विकास, रचनात्मकता।
Author affiliations
सहायक आचार्य शिक्षा शास्त्र उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय इलाहाबाद
