Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र में “बौद्ध धर्म में पर्यावरण” विषय के अंतर्गत भगवान बुद्ध के उपदेशों एवं बौद्ध साहित्य में निहित पर्यावरणीय चेतना का अध्ययन किया गया है। भगवान बुद्ध ने प्रकृति, वन, वृक्ष, जल, जीव-जंतुओं तथा समस्त प्राणियों के प्रति करुणा, अहिंसा और संरक्षण की भावना पर विशेष बल दिया। उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं का संबंध भी प्रकृति एवं पर्यावरण से दिखाई देता है। बौद्ध दर्शन में मनुष्य और प्रकृति को परस्पर संबद्ध माना गया है तथा सभी जीवों के कल्याण की भावना को महत्त्व दिया गया है। जातक कथाओं, विनय साहित्य तथा अन्य बौद्ध ग्रंथों में वृक्षों, वनों, नदियों और पशु-पक्षियों के संरक्षण से संबंधित अनेक प्रसंग मिलते हैं। भगवान बुद्ध ने वृक्षों के संरक्षण, वन्यजीवों के प्रति दया तथा प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग का संदेश दिया। वर्तमान समय में जल, वायु, ध्वनि एवं मृदा प्रदूषण तथा वनों के विनाश जैसी पर्यावरणीय समस्याओं के संदर्भ में बौद्ध धर्म की अहिंसा, संयम, सह-अस्तित्व और करुणा आधारित दृष्टि अत्यंत प्रासंगिक है। अतः बौद्ध पर्यावरण-दृष्टि आधुनिक समाज को सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की दिशा में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान कर सकती है।
Keywords
बौद्ध धर्म, पर्यावरण, भगवान बुद्ध, प्रकृति संरक्षण, अहिंसा, करुणा, वन संरक्षण, जीव-जंतु, पर्यावरण चेतना, सतत विकास।
Author affiliations
एसोसिएट प्रोफेसर B.Ed विभाग रतन सेन डिग्री कॉलेज बांसी सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश
