Abstract
सारांश
प्रस्तुत शोध-पत्र में आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवि हरिवंश राय बच्चन के प्रगीत काव्य में व्यक्त वैयक्तिकता, भावात्मक संवेदना, प्रेम, विरह, जीवन-दृष्टि तथा सामाजिक चेतना का आलोचनात्मक अध्ययन किया गया है। बच्चन की काव्य-संवेदना का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि निजी अनुभूतियाँ उनकी कविता में व्यापक मानवीय अनुभवों से जुड़ने की क्षमता प्राप्त करती हैं। उपलब्ध स्रोत-सामग्री के तृतीय अध्याय में मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा-निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल-अंतर, मिलन-यामिनी तथा प्रणय-पत्रिका जैसी कृतियों का परिचय और विवेचन मिलता है। इन कृतियों को आधार बनाकर इस अध्ययन में प्रगीत की प्रकृति, आत्माभिव्यक्ति, भावात्मकता, प्रतीक-योजना, भाषा-शैली और सामाजिक अर्थों पर विचार किया गया है। शोध का स्वरूप वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक और आलोचनात्मक है। यह अध्ययन किसी स्वतंत्र सर्वेक्षण या मात्रात्मक आँकड़ा-संग्रह पर आधारित नहीं है; इसके निष्कर्ष साहित्यिक सामग्री के पाठ-आधारित विवेचन के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।
Keywords
हरिवंश राय बच्चन, प्रगीत काव्य, वैयक्तिकता, संवेदना, सामाजिक चेतना, प्रेम, विरह, प्रतीकात्मकता, आधुनिक हिंदी कविता।
Author Affiliations
प्राचार्य
सिंगारी देवी स्मारक पीजी कालेज, रामनगर, अम्बेडकरनगर
